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सामान्य गृहिणी भी परिवार का कमाऊ सदस्य

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में घरेलू महिलाओं के कामकाज की आर्थिक नजरिए से व्याख्या की है। अदालत ने कहा है कि बीमा दावे के तहत घर की सामान्य गृहिणियों को भी कमाऊ सदस्यों की श्रेणी में ही माना जाना चाहिए। गृहिणी अपने परिवार की सेवा में अधिक समय देती है। उसके घरेलू कार्य को समझा जाना चाहिए कि वह काम करके पैसे कमा रही है। ऐसे में दुर्घटना बीमा दावे के निस्तारण में उसका मुआवजा कमाऊ सदस्य के रूप में मानते हुए ही निर्धारित किया जाना चाहिए। इस व्याख्या के साथ न्यायालय ने अपर जिला न्यायाधीश, महाराजगंज के उस अवार्ड को सही करार दिया है, जिसमें उन्होंने एक गृहिणी को परिवार के प्रति उसके योगदान को देखते हुए तीन हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से मुआवजा अवार्ड किया था। इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुनील अंबवानी तथा न्यायमूर्ति एएन मित्तल की खंडपीठ ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया है।
मामले के अनुसार उत्तर प्रदेश स्थित महाराजगंज जिले के भरवलिया नौका टोला की श्रीमती साफिदा खातून उम्र 50 वर्ष की 23 फरवरी, 2011 को सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की लापरवाही से मौत हो गई। उसके वारिसों ने दावा दाखिल किया। जिसे स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण ने दो लाख 64 हजार रुपये मुआवजा, दो हजार रुपये दाह कर्म एवं 25 सौ रुपये संपत्ति की क्षति के रूप में अवार्ड दिया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए चुनौती दी कि मृतका गैर कमाऊ सदस्य है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत गैर कमाऊ सदस्य की मानद आय 15 हजार रुपये वार्षिक है। ऐसे में 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से आय मान गृहणी को मुआवजा देना गलत है। हाई कोर्ट ने इस तर्क को सही नहीं माना और कहा कि सरला वर्मा केस का फैसला गृहणी पर भी लागू होगा जिसमें गैर कमाऊ की आय 100 रुपये प्रतिदिन मानी गई है। गृहिणी की सेवा की उपेक्षा नहीं की जा सकती।
http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=8&edition=2012-11-28&pageno=7#id=111755957272557256_8_2012-11-28